आगरा यूनिवर्सिटी में कमीशन का खेल, VC विनय पाठक पर FIR, करीबी गिरफ्तार – Commission in Agra University, FIR on VC Vinay Pathak, closeaide arrested lclv


लखनऊ के एकेटीयू यूनिवर्सिटी के वीसी रहे और वर्तमान में कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर विनय पाठक पर बिल पास करने के बाद में कमीशन की रकम वसूलने के लिए बंधक बनाकर रंगदारी वसूली की नामजद एफआईआर दर्ज हुई है. यूपी एसटीएफ ने विनय पाठक के करीबी और इस केस में आरोपी अजय मिश्रा को गिरफ्तार किया है.

कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक पर कमीशन के लिए बंधक बनाकर रंगदारी वसूली की एफआईआर दर्ज हुई है. लखनऊ के इंदिरा नगर थाने में दर्ज हुई इस एफआईआर में विनय पाठक के साथ लखनऊ की XLICT कंपनी और प्रिंटिंग प्रेस के मालिक अजय मिश्रा को भी नामजद किया गया है.

क्या है कमीशनखोरी का पूरा मामला

दरअसल, यह पूरा मामला आगरा के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हुए प्रिंटिंग वर्क में कमीशन से जुड़ा है. इंदिरा नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवाने वाले डिजिटल टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मालिक डेविड एम डेनिस ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी 2014 से एग्रीमेंट के तहत आगरा विश्वविद्यालय में प्री और पोस्ट एग्जाम का काम करती है.

विश्वविद्यालय के एग्जाम पेपर छापना, कॉपी को एग्जाम सेंटर से यूनिवर्सिटी तक पहुंचाने का पूरा काम इसी कंपनी के द्वारा किया जाता रहा है. साल 2019 में एग्रीमेंट खत्म हुआ तो डिजिटेक्स टेक्नोलॉजीज ने यूपीएलसी के जरिए आगरा विश्वविद्यालय का काम किया. साल 2020 से 21 और 21- 22 में कंपनी के द्वारा किए गए काम का करोड़ों रुपया बिल बकाया हो गया था.

जनवरी 2022 में अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के कुलपति का चार्ज विनय कुमार पाठक को मिला तो उन्होंने बिल पास करने के एवज में कमीशन की मांग की. एफआईआर दर्ज कराने वाले डेविड डेनिस ने फरवरी 2022 में कानपुर स्थित विनय पाठक के सरकारी आवास पर मुलाकात की और जहां पर 15 फ़ीसदी कमीशन की डिमांड रखी गई.

कंपनी के मालिक ने 15 फ़ीसदी कमीशन देने से मना किया तो विनय पाठक ने धमकाया कि 8 विश्वविद्यालय के कुलपति मेरे बनाए हैं, अगर कमीशन नहीं दिया तो किसी भी विश्वविद्यालय में काम नहीं कर पाओगे.

बिल पास करने के बाद कमीशन की रकम पहुंचाने पर मामला तय हुआ तो विनय पाठक ने अपने आईफोन से फेसटाइम में ऐप के जरिए कंपनी के एमडी डेविड एम डेनिश की लखनऊ के अजय मिश्रा से वीडियो कॉल पर बात करवाई और अजय मिश्रा का नंबर दिया. हिदायत दी गई कि बिल पास होते ही कमीशन की रकम अजय मिश्रा के पास कैश पहुंच जानी चाहिए.

पहला बिल 2.52 करोड़ का बना, जिसका 33 लाख रुपए का कमीशन बना. दूसरा बिल अप्रैल 2022 में 4 करोड़ 45 लाख का पास किया, जिसका 73 लाख रुपये कमीशन बना. बताया जा रहा है कि पहले बिल को पास करने की एवज में डेविड 30 लाख लेकर पहुंचा कमीशन के 3 लाख कम थे तो अजय मिश्रा ने उसे अपने घर में बंधक बना लिया और धमकी दी की कमीशन की रकम नहीं मिली तो जाने नहीं देंगे.

काफी मिन्नतें करने के बाद उसे छोड़ा गया और अगले ही दिन डेबिड ने बकाया के 3 लाख भी अजय मिश्रा को पहुंचा दिए थे. दूसरे बिल के 73 लाख का कमीशन कैश में देने पर डेविड ने असमर्थता जताई तो अजय मिश्रा ने राजस्थान के अलवर की इंटरनेशनल बिजनेस फॉर्म्स कंपनी के अलवर स्थित पीएनबी के खाते में कमीशन के 63 लाख ट्रांसफर किए गए और 10 लाख रुपए कैश लिए गए.

विनय पाठक ने तीसरा बिन 1 सितंबर 2022 को 2 करोड़ 79 लाख का पास किया और जिसके एवज में 35 लाख 55 हजार का कमीशन बना. यानी कुल 1 करोड़ 40 लाख रुपए का कमीशन वसूला गया. बता दें कि कानपुर के छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए विनय पाठक को बीते जनवरी 2022 में आगरा के डॉक्टर भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, जो सितंबर महीने तक रहा.

यह पूरा मामला इसी 9 महीने में अतिरिक्त कुलपति का चार्ज रहने के दौरान का है. 1 अक्टूबर को प्रोफेसर आशु रानी को आगरा के अंबेडकर यूनिवर्सिटी का कुलपति बनाया गया था. आगरा विश्वविद्यालय में बीएमएस की परीक्षा कॉपी लिखने में गड़बड़ी के मामले की यूपी एसटीएफ की आगरा यूनिट पहले ही जांच कर रही थी. 

जांच के दौरान कमीशन का यह मामला सामने आया इंदिरा नगर थाने में एफआईआर दर्ज हुई तो अब इस हाई प्रोफाइल केस की जांच एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश की निगरानी में यूपी एसटीएफ के डिप्टी एसपी अवनीश्वर श्रीवास्तव को सौंपी गई है. यूपी एसटीएफ ने फिलहाल अजय मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है.

एफआईआर में नामजद कानपुर की छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति विनय पाठक से भी यूपी एसटीएफ जल्द पूछताछ करेगी. इतना ही नहीं कमीशन का यह मामला खुलने के बाद लखनऊ की एकेटीयू यूनिवर्सिटी में भी विनय पाठक की तैनाती के दौरान कमीशन की शिकायतें यूपी एसटीएफ के पास पहुंची हैं.

 



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