दिल्ली में दिवाली से पहले ही बिगड़ेगी आबोहवा, अगले 9 दिन रहना होगा सावधान! – Delhi Air quality likely to worsen to poor quality in next few days ntc


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले ही प्रदूषण (Air Pollution) ने खतरे की घंटी बजा दी है. यहां आने वाले 9 दिनों तक वायु गुणवत्ता खराब रहने वाली है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर की वायु गुणवत्ता ( Air Quality) अगले कुछ दिनों में खराब श्रेणी में आने की संभावना जताई है. हालांकि, शुक्रवार को आसमान साफ ​​रहा और हवा की गुणवत्ता मीडिएम कैटेगिरी में दर्ज की गई.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 24 घंटे के वायु गुणवत्ता सूचकांक ( Air Quality Index) बुलेटिन के मुताबिक, दिल्ली की वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में 154 थी. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में अधिकतम तापमान सामान्य से दो डिग्री नीचे 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. आर्द्रता 96 से 47 प्रतिशत के बीच रही.

शनिवार-रविवार को खराब रहेगी हवा की गुणवत्ता

शनिवार को भी ऐसा ही मौसम रहने की संभावना है. IMD के एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार को अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमश: 32 और 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा. मौसम विज्ञान संस्थान ने वायु गुणवत्ता के संबंध में अलर्ट जारी किया. चेतावनी सिस्टम के अनुसार, शनिवार को हवा की गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी ( Poor Category) में और रविवार को खराब श्रेणी में रहने की संभावना है. 

18 अक्टूबर से 6 दिन मध्यम से खराब रहेगी वायु गुणवत्ता

17 अक्टूबर को हवा की गुणवत्ता खराब से मध्यम श्रेणी में रहने की संभावना है. इसके अगले छह दिन में मध्यम से खराब श्रेणी में रहने की संभावना है. बता दें कि पिछले हफ्ते दिल्ली में अच्छी बारिश हुई थी, जिससे हवा की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार हुआ था. हालांकि, ये सुधार ज्यादा दिन तक नहीं रह सका. आने वाले दिनों में दिवाली का त्योहार आ रहा है. ऐसे में आतिशबाजी देखने को मिलेगी.

जानिए वायु गुणवत्ता (AQI) के बारे में

शून्य से 50 के बीचअच्छा (Good)
51 और 100संतोषजनक (Satisfactory)
101 और 200मध्यम (Moderate)
201 और 300खराब (Poor)
301 और 400बहुत खराब (Very Poor)
401 और 500गंभीर (Severe)

दिल्ली-NCR में और जहरीली होगी हवा

दिल्ली-एनसीआर और इसके आसपास के इलाकों में बढ़ते प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, IIT दिल्ली में वायु गुणवत्ता पर हुई वर्कशॉप में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बारिश की वजह से जो पराली नहीं जलाई गई, वो अब एक साथ जलाई जाएगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर और गंगा के आसपास के मैदानी इलाकों में तेजी से प्रदूषण बढ़ेगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर में 30-70 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है क्योंकि अगली फसल का मौसम तेजी से आ रहा है. इसके लिए पराली सूखते ही किसान इसे जला देंगे. बता दें आईआईटी दिल्ली में 10 और 11 अक्टूबर को एयर क्वालिटी पर हुई वर्कशॉप में कई देशों के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने हिस्सा लिया.

वायु प्रदूषण को 70-80% तक कम करते हैं स्मॉग टावर

वहीं, दिल्ली सरकार पॉल्यूशन से निपटने की तैयारी कर रही है. यहां कम लागत वाले स्मॉग टावर बनाने की तकनीक विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है. राज्य सरकार ने पिछले साल दिल्ली में स्मॉग टावर लगाना शुरू किया था. दुनियाभर में चीन ने ऐसे स्मॉग टावरों का इस्तेमाल किया है, लेकिन उसके पास एक अलग तकनीक है. ये नीचे से हवा को सोखता है और ऊपर से छोड़ता है. मिनेसोटा विश्वविद्यालय द्वारा विकसित तकनीक के आधार पर पिछले साल अक्टूबर की बारिश के बाद आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली और डीपीसीसी द्वारा एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था. IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली और DPCC की टीमें अलग-अलग क्षमता, मौसम और दूरियों पर पंखा चलाकर इस परियोजना की लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि कई रेंज में प्रभाव को समझा जा सके.

पहली स्टडी रिपोर्ट जमा कर दी

IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली और DPCC की टीम ने एक साल पूरा होने के बाद पहली स्टडी रिपोर्ट जमा कर दी है. इस रिपोर्ट के अनुसार, इस स्मॉग टावर का औसत प्रदर्शन प्रदूषण को कम करने में 50 मीटर की दूरी तक 70-80% का प्रभाव डाल रहा है। हालांकि, जब दूरी को बढ़ाकर 300 मीटर कर दिया जाता है तो इसका प्रभाव 15-20% कम हो जाता है. स्मॉग टावरों ने 300 मीटर की सीमा तक प्रभाव दिखाया है. कई कारणों से स्मॉग टॉवर उतने प्रभावशाली नहीं हैं.

फाइनल रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेगी सरकार

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने भी शुक्रवार को स्मॉग टॉवर सिटव का दौरा किया. उन्होंने कहा कि चूंकि स्मॉग टावर पहली बार स्थापित किए गए थे, हम अभी भी विभिन्न तकनीकी उपकरणों का उपयोग करने के प्रयोग के चरण में हैं. टीम सभी मुश्किलों को दूर करने में लगी है. चूंकि पायलट प्रोजेक्ट दो साल का है, इसलिए वे अगले एक साल तक अपना अध्ययन जारी रखेंगे. खासकर आने वाली सर्दियों में जब प्रदूषण अपने चरम पर होगा. इसके बाद टीम फाइनल रिपोर्ट देगी. उस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे निर्णय लेगी.

 



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