अब कृष्ण भक्त – Krishna Consciousness


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अक्सर खुद को हनुमान भक्त के रूप में पेश किया है. हालांकि, हाल ही में चुनावी मौसम में गुजरात के अपने दौरे पर, आम आदमी पार्टी के संयोजक भगवान कृष्ण का नाम जपते देखे जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि गुजरात वह राज्य है जहां श्रीकृष्ण का राज्य द्वारका था और जो आज हिंदुओं के पवित्र चार धामों में से एक है. केजरीवाल ने कहा कि वे जन्माष्टमी के दिन पैदा हुए और इसलिए उन्हें दुष्ट राजा कंस (उनका आशय भाजपा से था) से लड़ने का स्वाभाविक अधिकार प्राप्त है. नाराज भाजपा ने 16 अगस्त, 1968 की तारीख को गूगल पर खूब खंगाला और दावा किया कि केजरीवाल का दावा झूठा है क्योंकि उस साल जन्माष्टमी 15 अगस्त को पड़ी थी यानी केजरीवाल के जन्म से एक दिन पहले. फैक्ट-चेकर्स का कहना है कि दोनों दावे अपनी-अपनी जगह सही हैं—खगोलीय गणना के अनुसार जन्माष्टमी की तिथि 15-16 अगस्त 1968 दोनों में पड़ी थी. लिहाजा, अभी के लिए तो हिसाब बराबर हुआ.

फिर दिखे लालू के तेवर

नई दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल की कार्यकारिणी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के भाषण ने नेताओं और कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है. पार्टी के नेता लालू यादव के भाषण में उठाए गए मुद्दों से तो प्रसन्न हैं ही लेकिन उत्साह की असली वजह यह है कि लालू ने कार्यकारिणी के पहले दिन दो भाषण खड़े होकर दिए. दूसरे दिन भी उनका भाषण हुआ. मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देने वाला उनका वीडियो पार्टी ने जारी भी किया. लंबे समय से बीमार चल रहे लालू को पुराने तेवर के साथ देर तक खड़े होकर भाषण देते देख पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि उनके शीर्ष नेता की सेहत सुधर रही है और आगे के सियासी संघर्ष में वे उनका नेतृत्व कर पाएंगे. उन्हें लगता है कि तेजस्वी यादव भले ही लालू के उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित हो गए हों लेकिन बिहार की राजनीति में लालू के करिश्मे का कोई विकल्प नहीं है.

इंदौर के ‘चुलबुल’ 

कुछ महीने पहले जब एक पुलिस इंस्पेक्टर का इंदौर से बाहर तबादला किया गया, तो मध्य प्रदेश सरकार के एक ताकतवर कैबिनेट मंत्री ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से दो टूक कह दिया कि अगर उस इंस्पेक्टर को वापस नहीं लाया गया तो सीएम उनसे किसी सहयोग की आशा न करें. मंत्री की जिद के आगे पहले तो चौहान झुके, पर 8 अक्तूबर को उसे निलंबित कर दिया. बताया गया कि यह ऐक्शन इंदौर के भाजपा सांसद शंकर लालवानी की शिकायतों पर लिया गया जिन्होंने उस इंस्पेक्टर पर रंगदारी वसूलने का आरोप लगाया था. विपक्ष ने सवाल किया है कि आखिर उस अफसर को पहले वापस क्यों लाया गया था?

सीएम का काला जादू

के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति करके अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाएं जाहिर कीं. इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि तेलंगाना के सीएम एक तांत्रिक के बहुत ज्यादा प्रभाव में हैं और उन्हीं की सलाह पर नाम परिवर्तन हुआ है. प्रदेश भाजपा ने आरोप लगाया कि केसीआर ”अपने फार्महाउस पर तांत्रिक क्रिया कर रहे थे जिसमें उन्होंने एक काली बिल्ली का उपयोग किया.” वे वहां सप्ताह में दो दिन बिताते हैं. सीएम तो आरोपों पर चुप हैं, लेकिन उनके भतीजे और राज्य के वित्त एवं स्वास्थ्य मंत्री टी. हरीश राव ने कहा है कि बीएचयू में भूत विद्या का कोर्स शुरू करने वाली भाजपा के विपरीत टीआरएस को तंत्र विद्या पर नहीं लोकतंत्र पर भरोसा है.

बिन पेंदे का लोटा कौन?

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शेखावाटी में एक पहेली छोड़ आए हैं. शेखावत राजस्थान के सैनिक कल्याण राज्य मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा के गांव गुढ़ा पौंख में पहुंचे तो गुढ़ा का जिक्र करते हुए कहा, ”हमारे यहां भरतपुर के लिए कहा जाता है कि वहां के लोग बिना पेंदे के लोटे की तरह होते हैं जो कब किधर लुढ़क जाएं, किसी को नहीं पता.” शेखावत ने यह बात कही तो गुढ़ा के लिए थी लेकिन, राजनीतिक हलकों में इसे भरतपुर के दिग्गज नेता विश्वेंद्र सिंह से जोड़कर भी देखा जाने लगा. गुढ़ा गहलोत कैंप छोड़कर पायलट के समर्थक बन गए हैं तो विश्वेंद्र सिंह पायलट कैंप छोड़कर आजकल अशोक गहलोत का साथ निभा रहे हैं. सयाने बता रहे हैं कि गजेंद्र सिंह ने कहावत से दोनों पर निशाना साधा है.

—साथ में हिमांशु शेखर, राहुल नोरोन्हा, अमरनाथ के. मेनन और आनंद चौधरी



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